बस्तर। नक्सल ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता और कुख्यात नक्सली कमांडर हिडमा के ढेर होने के बाद अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अगले सप्ताह छत्तीसगढ़ के दौरे पर पहुंचेंगे। अमित शाह का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह 13 दिसंबर को बस्तर पहुंचेंगे। यहां वे बस्तर ओलंपिक से जुड़े विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के दौरान वे बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा देने वाले आयोजनों को भी संबोधित कर सकते हैं।
इस दौरे के दौरान गृहमंत्री शाह सुरक्षा एजेंसियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक में हालिया ऑपरेशन, नक्सल संगठन की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी। अमित शाह उन सुरक्षाबल की टीमों से सीधे संवाद कर सकते हैं जो हाल ही में चले सफल ऑपरेशन का हिस्सा थीं।
यह बैठक इसलिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिडमा को लंबे समय से सुरक्षा बलों की सूची में सबसे वांछित नक्सल कमांडरों में शामिल किया जाता था। उसके खात्मे को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बता दें कि हिडमा उर्फ संतोष को सबसे वांछित माओवादी कमांडर माना जाता था। माना जाता है कि उसकी उम्र करीब 51 साल थी और वह पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर एक का चीफ था, जिसे सबसे खतरनाक माओवादी स्ट्राइक यूनिट कहा जाता है। सुकमा जिले के पुरवती गांव में जन्मे, उसने बस्तर दलम और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य के तौर पर काम किया और पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर बड़े हमलों का मास्टरमाइंड बन गया। उसने व्यक्तिगत रूप से दंतेवाड़ा और सुकमा में 30 से ज्यादा हमलों का नेतृत्व किया। अलग-अलग राज्यों ने हिडमा पर 6 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया था। वह 25 साल पहले छिप गया था, कम उम्र में ही सेंट्रल कमेटी का सदस्य बन गया था। वह सीपीआई (माओवादी) सेंट्रल कमेटी में छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से एकमात्र आदिवासी था। कहा जाता है कि हिडमा 2010 में दंतेवाड़ा में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के 76 जवानों के नरसंहार का मास्टरमाइंड था। यह भारत में सुरक्षा बलों पर माओवादियों का सबसे घातक हमला था। उस पर 2013 में छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में टॉप कांग्रेस नेताओं सहित 27 लोगों की हत्या में शामिल होने का भी शक था। हिडमा को 2021 में छत्तीसगढ़ के सुकमा में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 22 जवानों की हत्या का मास्टरमाइंड भी माना जाता है।
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