Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिलती दिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज 1 करोड़ 05 लाख रुपये के इनामी नक्सली रामधेर मज्जी सहित 12 हार्डकोर माओवादियों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता त्याग दिया है। सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति, लगातार विश्वास-निर्माण की पहल और सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति का यह बड़ा परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 4,000 से अधिक नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सलवाद की विचारधारा अपनी जमीन खो चुकी है और अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की समन्वित नीति, विकास की तेज़ रफ्तार और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र मजबूत होने से माओवादी गतिविधियाँ लगातार कमजोर पड़ी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण अंत का संकल्प अब वास्तविकता में बदलता दिख रहा है। रणनीतिक अभियान, इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन और प्रभावित क्षेत्रों में तेज़ विकास कार्यों के कारण माओवादी दबाव में हैं और आत्मसमर्पण का सिलसिला तेज होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने दशकों तक बस्तर और अन्य प्रभावित इलाकों में विकास की गति को रोके रखा था। कई गांव सड़क, बिजली, संचार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। नक्सलवाद की पकड़ ढीली पड़ने से सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति, मोबाइल नेटवर्क विस्तार, स्कूल-अस्पताल विकास और रोज़गार के अवसरों में लगातार वृद्धि हो रही है। आम लोगों के जीवन में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है।

सरकार ने पुनर्वास नीति को प्रभावी, सुरक्षित और मानवीय बनाया है। हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने वाले माओवादी अब सम्मान, सुरक्षा और रोज़गार के अवसरों के साथ नया जीवन शुरू कर रहे हैं। सरकार उन्हें कौशल प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, घर-परिवार की सुरक्षा, शिक्षा और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “यही बदलता हुआ छत्तीसगढ़ है—जहाँ बंदूक की जगह संवाद, हिंसा की जगह विकास और आतंक की जगह लोकतंत्र की ताकत बोल रही है।” उन्होंने विश्वास जताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जल्द ही स्थायी शांति स्थापित होगी और बस्तर सहित पूरे राज्य में समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।

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