मुंबई। भारतीय पूंजी बाजार के नियामक सेबी (सेबी) एक ऐसी नई व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिससे शेयरों की लिस्टिंग से पहले ही उन्हें खरीदा या बेचा जा सके। सेबी का यह कदम निवेशकों को एक सुरक्षित और विनियमित प्लेटफॉर्म पर शेयर ट्रेडिंग की सुविधा देने के मकसद से किया जा रहा है। सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने 21 जनवरी को इसकी जानकारी दी। 
रिपोर्ट्स के मुताबिक माधबी ने कहा कि जब शेयर निवेशकों को अलॉट होते हैं, लेकिन वे अभी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं हुए होते, तब अक्सर ग्रे मार्केट में उनका व्यापार होता है। उन्होंने कहा, “अगर निवेशकों को ऐसी ट्रेडिंग में रुचि है, तब इस पूरी प्रक्रिया को अनौपचारिक रूप से करने के बजाय एक नियामित प्लेटफॉर्म पर करने का मौका दिया जाना चाहिए। सेबी प्रमुख माधुरी बुच ने कहा कि प्रणाली के तहत, जब आईपीओ के शेयर निवेशकों के डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएंगे, तब से लेकर स्टॉक एक्सचेंज पर उनकी आधिकारिक लिस्टिंग तक ट्रेडिंग की अनुमति होगी। मौजूदा समय में, शेयर लिस्टिंग से पहले फ्रीज रहते हैं, ताकि अनियमित और असुरक्षित ट्रेडिंग को रोक सके। 
सेबी का यह कदम ग्रे मार्केट में हो रही अनियमित ट्रेडिंग पर लगाम लगाने की दिशा में उठाया गया है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) अक्सर निवेशकों के लिए संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत माना जाता है, लेकिन यह एक असुरक्षित बाजार है जहां निवेशकों को नुकसान का खतरा रहता है। 
यह योजना तब लाई जा रही है जब आईपीओ बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। 2024 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने एशिया में सबसे ज्यादा आईपीओ लांच करने का रिकॉर्ड बनाया है और प्राइमरी मार्केट से बड़ी पूंजी जुटाई है। 2025 में भी आईपीओ बाजार के और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

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News Desk
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