रायपुर: प्रदेश में नक्सल प्रभावित जिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों में विज्ञान एवं वाणिज्य विषय के प्रति रुचि बढ़ाने एवं शिक्षकों की कमी दूर करने के उद्देश्य से शासन द्वारा विशेष पहल शुरू की गई है। सरकार द्वारा आर्यभट्ट विज्ञान-वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना के तहत दुर्ग एवं जगदलपुर में 500-500 सीटर विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण केंद्र स्थापित किए गए है। जिससे इन विशेष शिक्षण केंद्रो के माध्यम से इन वर्गाे के विद्यार्थियों को विशेष अवसर मिल रहा है।
आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013-14 से शुरू की गई इस योजना के तहत स्नातक स्तर पर गणित एवं विज्ञान विषय हेतु 80-80 सीटें और वाणिज्य विषय हेतु 40 सीटें आरक्षित हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर विज्ञान हेतु 80 तथा वाणिज्य हेतु 20 सीटें निर्धारित की गई हैं। बी.एड. कार्यक्रम के लिए कुल 200 सीटें स्वीकृत हैं। 500 स्वीकृत सीटों में 80 प्रतिशत सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं । अधिकारियों ने बताया कि इस योजना में चयनित विद्यार्थियों को शिक्षक पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित की जाने वाली प्री.बी.एड. और टी.ई.टी. परीक्षा हेतु मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन प्रदान किए जाते हैं। वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 2 करोड़ 40 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में अब प्रवेश और चयन के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों में आर्यभट्ट विज्ञान-वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना के माध्यम से रुचि और भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2023-24 में विज्ञान-वाणिज्य विकास केन्द्र दुर्ग में 452 बालिकाओं ने प्रवेश लिए थे। इसी प्रकार विज्ञान वाणिज्य विकास केन्द्र जगदलपुर में 168 बालकों ने प्रवेश लिया था। इस वर्ष विभिन्न पदों पर चयनित विद्यार्थियों की संख्या 49 रही।
इसी प्रकार वर्ष 2024-25 में कन्या शिक्षण केन्द्र दुर्ग में प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 473 और बालक केन्द्र जगदलपुर में 199 हो गई, जबकि विभिन्न पदों पर चयनित विद्यार्थियों की संख्या इस वर्ष 10 रही। वही वर्ष 2025-26 में कन्या शिक्षण केन्द्र दुर्ग में 477 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ, वहीं बालक शिक्षण केन्द्र जगदलपुर में 275 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
राज्य शासन की इस पहल से जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों के न केवल विज्ञान और वाणिज्य विषयों में रुचि में वृद्धि हो रही है, बल्कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के योग्य विद्यार्थियों को शिक्षकों के रूप में विशेष अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उनके करियर और सामाजिक विकास दोनों को मजबूती मिल रही है।
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