नेशनल डेस्क : मंगलवार को तांबे की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। पहली बार तांबे की कीमत 13,000 डॉलर प्रति टन के आंकड़े को पार कर गई। इस तेजी के पीछे तांबे की सप्लाई में आई कमी, चिली की खानों में हड़ताल और गोदामों में स्टॉक कम होना मुख्य वजहें हैं।
वैश्विक स्तर पर तांबे की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तांबे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। अमेरिका के कॉमेक्स पर तांबे की कीमतों में 4.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 5.9005 डॉलर प्रति पाउंड यानी 13,008 डॉलर प्रति टन पर पहुंच
कीमतों में तेजी के कारण
लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में तांबे के भंडार में गिरावट के कारण कीमतों में उछाल आया है। एलएमई में तांबे का भंडार अगस्त के अंत की तुलना में 55 प्रतिशत घटकर 142,550 टन रह गया है। अधिकतर तांबा अमेरिका भेजा गया, जहां तांबे पर टैरिफ की समीक्षा चल रही है। 1 अगस्त से तांबे के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी में छूट दी गई थी।
चिली की खानों में हड़ताल का असर
उत्तरी चिली में कैपस्टोन कॉपर की मंटोवर्दे कॉपर और सोने की खानों में चल रही हड़ताल से सप्लाई घटने का डर बढ़ गया है। इस खदान से इस साल करीब 29,000 से 32,000 मीट्रिक टन तांबा उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि यह वैश्विक उत्पादन का छोटा हिस्सा है, फिर भी उत्पादन पर असर की चिंता बनी हुई है।
भारत में तांबे की कीमतें
भारत में भी तांबे की कीमतों में तेजी देखने को मिली। मंगलवार को दोपहर 12:10 बजे MCX पर 27 फरवरी 2026 के एक्सपायरी वाले तांबे का भाव 1,350.05 रुपये प्रति किलोग्राम था। दिन की शुरुआत कीमत 1,338.25 रुपये से हुई और दिन के अंत में यह 1,331.75 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान तांबा 1,355 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचा।
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