Dementia Symptoms : अब तक माना जाता था कि याददाश्त का खोना ही डिमेंशिया (Dementia) की पहली पहचान है लेकिन हाल ही में हुई एक क्रांतिकारी रिसर्च ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि आपकी आंखों की रेटिना की मोटाई यह बता सकती है कि भविष्य में आपको डिमेंशिया या अल्जाइमर होने का खतरा है या नहीं।
क्या है डिमेंशिया और आंखों से इसका रिश्ता?
डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जिसमें व्यक्ति की सोचने, समझने और याद रखने की शक्ति धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। चीन के वैज्ञानिकों ने करीब 30,000 लोगों पर 10 साल तक अध्ययन किया। ‘फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस’ जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार हमारी आंखों की रेटिना (Retina) दिमाग की सेहत का आईना होती है। रेटिना आंखों के पीछे की वह परत है जो रोशनी को संकेतों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाती है। चूंकि आंखों की नसें (Optic Nerve) सीधे दिमाग से जुड़ी होती हैं इसलिए दिमाग में होने वाली कोई भी हलचल आंखों में दिखाई दे सकती है।
रिसर्च के चौंकाने वाले नतीजे
वैज्ञानिकों ने रेटिना की मोटाई मापने के लिए OCT (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) तकनीक का इस्तेमाल किया। रिसर्च में जो बातें सामने आईं वे बेहद महत्वपूर्ण हैं:
- पतली रेटिना, बढ़ता खतरा: जिन लोगों की रेटिना की परत पतली पाई गई उनमें अल्जाइमर का खतरा काफी अधिक था।
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- 3% का गणित: रेटिना की मोटाई में हर एक यूनिट की कमी डिमेंशिया के खतरे को 3 फीसदी बढ़ा देती है।
- फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD): जिन लोगों की रेटिना का मध्य हिस्सा बहुत पतला था उनमें FTD होने की संभावना 41 फीसदी ज्यादा पाई गई।
डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
अगर आप या आपके आसपास कोई इन लक्षणों का सामना कर रहा है तो सतर्क हो जाएं:
- याददाश्त की कमी: हाल ही में हुई बातों या नामों को भूल जाना।
- बोलने में कठिनाई: बातचीत के दौरान सही शब्दों का चुनाव न कर पाना।
- भ्रम की स्थिति: समय, स्थान या लोगों को पहचानने में देरी होना।
- व्यवहार में बदलाव: अचानक चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन या मूड स्विंग्स।
- फैसला लेने में असमर्थता: रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसले लेने में भी दिक्कत महसूस करना।
बचाव और सावधानी
हालांकि डिमेंशिया का कोई पक्का इलाज नहीं है लेकिन समय रहते पहचान और सही जीवनशैली से इसे धीमा किया जा सकता है:
- नियमित व्यायाम: शारीरिक सक्रियता दिमाग की कोशिकाओं को स्वस्थ रखती है।
- हेल्दी डाइट: ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें।
- दिमाग की कसरत: सुडोकू, शतरंज या नई भाषाएं सीखकर दिमाग को सक्रिय रखें।
- नियमित जांच: 50 की उम्र के बाद आंखों और न्यूरोलॉजिकल चेकअप करवाते रहें।
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