Raipur. रायपुर। राजधानी समेत देशभर में गणेशोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बुधवार, 27 अगस्त 2025 से गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। हर साल की तरह इस बार भी गणपति बप्पा की आराधना, स्थापना और विसर्जन को लेकर जगह-जगह समितियां सक्रिय हैं। वहीं गणेशोत्सव में डीजे बजाने को लेकर रायपुर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को रायपुर एएसपी लखन पटले ने शहर के डीजे संचालकों के साथ बैठक की और सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट की गाइडलाइन का पालन करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

एएसपी पटले ने कहा कि इस बार गणेशोत्सव में केवल पारंपरिक वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल की अनुमति रहेगी। डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से किसी भी डीजे संचालक को संचालन के लिए NOC जारी नहीं की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल, स्कूल और सार्वजनिक स्थलों से 100 मीटर के दायरे में डीजे बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा रात 10 बजे के बाद डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। तेज आवाज में डीजे बजाने पर भी रोक होगी। एएसपी पटले ने कहा कि अगर कोई वाहन नियमों का उल्लंघन करता है और उस पर एक से अधिक बार चालानी कार्रवाई होती है तो उस गाड़ी को राजसात कर लिया जाएगा। साथ ही, प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई डीजे संचालक डीजे बजाते पाया गया तो उसके खिलाफ भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।

डीजे संचालक नहीं माने पुलिस की बात
पुलिस की सख्ती के बीच रायपुर के डीजे धुमाल संघ ने अलग रुख अपनाया है। संघ के अध्यक्ष गौतम महानंद ने कहा कि अगर डीजे बजाना पूरी तरह बंद कर देंगे तो उनके साथियों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार वे कम साउंड में डीजे और धुमाल बजाएंगे। गौतम महानंद ने कहा – “गणेशोत्सव हिंदुओं का प्रमुख पर्व है। बप्पा का आगमन और विसर्जन डीजे धुमाल के बिना अधूरा लगता है। हालांकि, हम पुलिस की गाइडलाइन का ध्यान रखेंगे और कम साउंड में डीजे-धुमाल बजाएंगे। पिछले साल भी डीजे बजाने पर हमें भारी-भरकम चालान पटाना पड़ा था, लेकिन हमारे काम पर रोक लगाना हमारे परिवारों की रोजी-रोटी छीनना है।”
पुलिस-पब्लिक आमने-सामने
रायपुर पुलिस और डीजे संचालकों के बीच इस मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति बन गई है। पुलिस जहां कानून व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के मूड में है, वहीं डीजे संचालक इसे रोजी-रोटी का सवाल बता रहे हैं। स्थानीय समितियों का कहना है कि गणेशोत्सव के दौरान डीजे और धुमाल के बिना जुलूस अधूरा लगता है। कई युवा डीजे धुमाल के साथ बप्पा की आराधना को उल्लासपूर्ण मानते हैं। लेकिन दूसरी ओर, शहरवासियों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि तेज आवाज वाले डीजे से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, मरीजों को दिक्कत होती है और बुजुर्गों की नींद हराम होती है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की गाइडलाइन
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कई बार धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। वहीं ध्वनि प्रदूषण स्तर से अधिक आवाज में डीजे बजाना भी गैरकानूनी है। पुलिस प्रशासन ने कहा है कि इस बार गणेशोत्सव के दौरान विशेष गश्त और निगरानी की जाएगी। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए मोबाइल टीम बनाई गई है, जो मौके पर जाकर जांच करेगी। अगर कहीं भी डीजे बजाने की शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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